
अनंत धाम (अनंत आत्मबोध जागृति ट्रस्ट) एक आश्रम है, जो हरिद्वार के ठीक बाहर और राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से कुछ किलोमीटर दूर, अंबुवाला, पथरी की कृषि भूमि के बीच स्थित है। 2008 में उसी पावन मिट्टी पर स्थापित, जहाँ अनंत बाबा का जन्म हुआ, यह आश्रम दो मार्गदर्शक आदर्शों को आत्मसात करता है: "वसुधैव कुटुम्बकम—दुनिया एक परिवार है" और "मानवता की सेवा करो, दिव्यता को देखो।"
प्रकृति में रचा-बसा परिवेश
खिलते बगीचे, पक्षी-घर और आने वाले हिरण ध्यान व अध्ययन के लिए एक शांत वातावरण रचते हैं। मुख्य स्थल:
अनंतेश्वर महादेव मंदिर
दैनिक आरतियों से पवित्र विस्तृत शिव मंदिर।




संत निजानंद जी की धूना
अग्नि से प्रज्वलित कुटिया, जहाँ संध्या को भगवद गीता के प्रवचन होते हैं।




सामुदायिक रसोई और भोजन कक्ष—जहाँ पौष्टिक सात्त्विक भोजन बनता है—साथ ही कुछ साधारण अतिथि-कक्ष और चिंतन हेतु छायादार आँगन।




दैनिक लय
अनंत धाम का जीवन सेवा (निःस्वार्थ सेवा), सत्संग (सत्य की संगति) और सिमरन (निरंतर स्मरण) की धारा में बहता है। आगंतुक बागवानी, मंदिर-सेवा, पशु-कल्याण और भोजन-तैयारी में निवासियों के साथ जुड़ते हैं—"हाथ सेवा में, मन भगवान में" के सिद्धांत को जीते हुए। प्रातः ध्यान से दिन का कर्म आरंभ होता है; सूर्यास्त पर सब मिलकर जप और गीता पाठ के लिए एकत्र होते हैं।






























सेवा परियोजनाएँ और जनसेवा
ट्रस्ट के कार्यक्रम मानवीय आवश्यकता के संपूर्ण आयामों को स्पर्श करते हैं:
मूलभूत जीवन-निर्वाह
नि:शुल्क भोजन, वस्त्र और आश्रय; हर सितंबर 15-दिवसीय वार्षिक भंडारा, जिसमें प्रतिदिन लगभग 8,000 लोगों को भोजन कराया जाता है।
शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण
विद्यालय, छात्रवृत्तियाँ और कौशल कार्यशालाएँ—सम्मानजनक आजीविका को बढ़ावा देने हेतु।
स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच
निकटवर्ती गाँवों में नियमित चिकित्सा, दंत एवं नेत्र शिविर।
आध्यात्मिक विकास
वैश्विक साधकों के लिए रिट्रीट, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और ऑनलाइन सत्संग।
चाहे आप एक दिन की सेवा के लिए आएँ, एक महीने के अध्ययन के लिए, या आजीवन मार्ग के लिए—अनंत धाम आपको एक श्वास, एक पृथ्वी, एक परिवार के रूप में जीने और भीतर ही अनंत को खोजने का आमंत्रण देता है। जय राम जी की।